मोदीजी के अनमोल विचार

मोदीजी के अनमोल विचार

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जितना अधिक आप मेरे ऊपर कीचड़ फेंकेंगे, उतना अधिक कमल खिलेगा।

कुछ बनने के लिए सपने मत देखो बल्कि कुछ ऐसा करके दिखाना है ऐसा सपना देखना चाहिए।

स्वच्छ भारत का सपना गांधीजी ने देखा था, आईये इसे हम साकार करें।

मैं एक छोटा आदमी हूँ और मैं छोटे छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करना चाहता हूँ।

हमारी जिम्मेदारी देश को चलाने की ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों को साथ में लेकर चलने की है।

आतंकवाद का कोई मजहब नही होता। यह युद्ध से भी बदतर है। भारत ने अपने युद्धों की तुलना में आतंकवाद से ज्यादा लोगों को खोया है।

अपने जीवन में न मैने माँ-बाप की दौलत पाई है और मुझे धन दौलत चाहिए भी नहीं। अगर मेरे पास कुछ है भी तो वो है मेरे माँ का दिया हुआ आशीर्वाद जो मुझे हमेसा आगे बढने की प्रेरणा देती है।

समाज की सेवा करना यानी एक तरह से हमे एक तरह से अपने ऋण चुकाने का मौका है।

मैं लोगों की शक्ति पर विश्वास करता हूँ। इसमें एक बेहतर समाज और राष्ट्र बनाने की क्षमता होती है।

यदि 125 करोड़ लोग एक साथ काम करे, तो भारत 125 करोड़ कदम आगे बढ़ जायेंगा।

कठिन परिश्रम कभी असफल नहीं होता। वह आपको संतुष्ट ही करता है।

लोग हमारे बारे में सोचते है की भारत देश सापो का और काले जादू का देश है। लेकिन हमारे युवायो ने अपने IT कौशल से विश्व को हैरान कर रखा है। डिजिटल इंडिया ही मेरा सपना है।

मेरे लिए राजनीती कोई लक्ष्य नहीं। बल्कि ये तो एक अभियान है।

एक सरकार वह होती है जो गरीबो के बारे में सोचती है और उनकी आवाज़ सुनती है। सरकार ने हमेशा गरीबो के लिए जीना चाहिये।

महात्मा गांधी ने कभी स्वच्छता के साथ समझौता नहीं किया। उन्होंने हमें आज़ादी दी। हमें उन्हें एक स्वच्छ भारत देना चाहिये।

मुझे देश के लिए मरने का अवसर नहीं मिला है, लेकिन मुझे देश के लिए जीने का अवसर मिल गया है।

हमारा मन्त्र है सबका साथ सबका विकास।

मैंने चाय बेची है, लेकिन कभी अपना देश नहीं बेचा।

हमारे देश की सेना बात नही करती रणक्षेत्र में अपना पराक्रम दिखाती है।

नोटबंदी से हमारे देश की जनता तो आज पहली बार चैन की सास लेकर सोने जा रही है जबकि कुछ लोग आज से नीद की गोलिया लेना शुरू कर देंगे।

लोकतंत्र में जनता का ही फैसला सर्वमान्य होता है जिसे मानना हम सबकी जिम्मेदारी है।

जो हमारे दादा दादी ने किया मेरे माँ बाप ने भी वैसा किया क्या हमे भी वैसा करना चाहिए इस सोच पर देश नही चलती हम तो अपने बडो से मार्गदर्शन तो ले सकते है लेकिन सोच और परिस्थिति तो अपने समय के हिसाब से होती है और उसी के अनुसार आगे बढ़ा जा सकता है। .

मैं आपसे वादा करता हूँ कि अगर आप एक दिन में 12 घंटे तो काम करेगे तो मै 13 घंटे काम करुँगा, अगर आप 13 घंटे तो मै 14 घंटे और आप 14 घंटे काम करेगे तो मै 15 घंटे काम करुगा क्योंकि मै आप सबका प्रधानमन्त्री नही प्रधानसेवक हूँ।

हमारे द्वारा की गयी कड़ी मेहनत कभी थकान नही लाती बल्कि उसे पूरा करने से संतोष का आनंद प्राप्त होता है।

हमारे मन की कोई समस्या नही होती समस्या तो केवल हमारे मानसिकता की होती है जिसकी उपज के लिए खुद हम जिम्मेदार होते है।

हर इन्सान के अंदर दो गुण होते है एक अच्छा और एक बुरा और इन्सान जिस पर अपना ध्यान लगाएगा वैसा ही बन जायेगा।

मेरे जीवन का लक्ष्य ही सबकुछ है पर मेरी महत्वकांक्षा कुछ भी नही है अगर मै नगर निगम का अध्यक्ष भी होता तो भी मै उतना ही मेहनत करता जितना की आज मै प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री होकर करता हु।

मेरे लिए धर्म का मतलब अपने काम के प्रति निष्ठावान और देश के प्रति समर्पण है।

एक गरीब परिवार का बेटा भी अपनी बातें कह सकता है और अपने हक के लिए लड़ सकता है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

मैंने चाय बेचा है, देश बेचना कभी नहीं सीखा है।

करोड़ों लोगों का यह देश मेला है कौन कहता है कि मोदी अकेला है।

गुजरात का विकास माडल देश के विकास विकास का माडल हो सकता है।

जब कोई कहता है की प्रधानमन्त्री कमजोर हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि लोग उसके शारीरिक क्षमता के बारे में कह रहे हैं बल्कि प्रधामंत्री वो पद होता है जिसकी गरिमा कम हो गयी है और जिस कार्यालय में बैठता है वो कार्यालय सबसे सशक्त कार्यालय होता है लेकिन वो कार्यालय की शक्ति खत्म सी हो गयी है।

हम स्किल्ड इंडिया चाहते हैं लेकिन पिछली सरकार ने पिछले 10 साल से से भारत को स्कैम इण्डिया बना दिया है।

मोदी-सरकार विरोधी ताकतों का सिर्फ एक ही एजेंडा है, मोदी को रोको।

लगातार जो चलते हैं वही मीठा फल पाते हैं। सूरज की अटलता देखो लगातार गतिशील और निरंतर चलने वाला कभी नहीं रुकने वाला। इसलिए हमें भी हमेसा आगे ही बढ़ते रहना चाहिए।

एक गरीब कभी मुफ्त की नही खाना चाहता, उसे तो सिर्फ अपने काम के बदले पैसे लेना चाहता है। और इस देश के गरीब में वो ताकत है यदि उसे काम करने का मौका मिले तो बंजर मिट्टी से भी सोना उगा सकता है।

लोकतंत्र में कोई किसी का दुश्मन नही होता बल्कि यहाँ यही प्रतिस्पर्धा होती है की देश के विकास के लिए कौन अधिक से अधिक अच्छा कार्य कर सकता है।

डरते वही हैं जो अपनी छवि के लिए मरते हैं। मै तो अपने भारतवर्ष की छवि के लिए मरता हूँ इसलिए किसी से नही डरता हूं।

सरकार किसी एक की विशेष पार्टी नही होती , बल्कि ये लोकतंत्र में सभी लोगो की लिए होती है। ​​

मै न तो मुफ्त में भोजन दूंगा और न मुफ्त में पानी, बल्कि मैं रोजगार के लिए इतने अवसर लाऊंगा और भारत देश के युवाओं को इतना सक्षम बनाऊंगा की देश का हर नौजवान अपने स्वाभिमान से अपना पेट भर सकेगा और दुसरों के प्यास बुझा सकेगा।

किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए उसका घोषणापत्र गीता और कुरान की तरह होना चाहिए।

हमारा दिमाग कभी मुश्किलें पैदा नहीं करता। हमारी सोच मुश्किलें पैदा करती है।

क्या मुझे कोई बता सकता है की हम क्या कर रहे है। क्या हमने कभी अपने आप से पूछा की हम जो भी काम कर रहे है क्या वह गरीबो या देश के लिए फायदेमंद है? हम हमेशा यही सोचते है की ‘मै देश के बारे में क्यों सोचु’ हमारा यही रवैया देश की प्रगति में सबसे बढ़ी रूकावट है।

हम में से हर एक के पास आग की तरह बढ़ने की शक्ति है। तो क्यों ना हम इस शक्ति का उपयोग करे।

मेरा संघर्ष ही जीवन को फाइल (दस्तावेजो) में ले जाना है।.

हम में से हर एक के पास या तो अच्छे गुण है या बुरे गुण है। लेकिन जिन्होंने अच्छे गुणों पर ध्यान केन्द्रित किया उन्होंने निश्चित ही सफलता प्राप्त की।

दुनिया बदल चुकी है। भारत अब किसी कोने में नहीं बैठा दिखेंगा। अब भारत अपना भविष्य निर्मित करेंगा।

हम किसी व्यक्ति की सनक के हिसाब से सरकार नहीं चलाते , हमारा विकास सुधारों द्वारा संचालित है , हमारे सुधार नीति द्वारा संचालित हैं और हमारी नीतियां लोगों द्वारा संचालित हैं.|

मेरे राज्य मे लालफीताशाही नहीं है , सिर्फ लाल कालीन है .|

कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती , वह संतोष लाती है.

मन कभी समस्या नहीं है ; मानसिकता है .|

योग सिर्फ रोग मुक्ति के लिए नहीं है बल्कि यह लोभ लालच से भी मुक्ति के लिए हैं। .

मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि योग को अपने जीवन का हिस्सा बनायें। योग स्वास्थ आश्वासन के लिए है और योग करना महंगा भी नहीं है।

हर एक नागरिक को यह एहसास होना चाहिए कि यह मेरा देश है और मुझे अपने देश के उन्नति के लिए कड़ी मेहनत करना होगा, मुझे अपने देश के विकास के लिए अपना कुछ योगदान देना ही होगा।

मात्र सरकार और सरकार के पहल एक नया भारत नहीं बना सकते हैं। देश का बदलाव या विकास हर एक भारतीय व्यक्ति और नागरिक के द्वारा ही हो सकता है।

देश शांति, एकता और सद्भावना से चलता है…सबको साथ लेकर चलना हमारी सभ्यता एवं संस्कृति है।

हमें एक ऐसे संस्कृति को अपनाना चाहिए, जहां खेल की सराहना की जाती है और वह परिवार से शुरू होता है।

आज भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उज्ज्वल स्थान के रूप में वर्णित किया गया है। यह सबसे आकर्षक वैश्विक निवेश स्थलों में से एक के रूप में उभरा है।

मनुष्य का मन ही ऐसा होता है कि वर्षाकाल इसके लिए बड़ा लुभावना काल होता है। पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति, – सभी वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं।

हम अहिंसा की भूमि हैं। हम महात्मा गाँधी की धरती हैं। एक समाज के रूप में, यहाँ हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। हिंसा कोई मुश्किल दूर नहीं करता है।

व्यक्ति के जीवन में, समाज के जीवन में कुछ भी अच्छा करना है, तो कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। स्वच्छता का भी विषय ऐसा ही है। बुरी आदतों से मुक्ति पाने के लिए अविरत रूप से हमें प्रयास करना ही पड़ेगा।

धन जो दे कर बढ़ता है, वह धन ज्ञान है और सभी संपत्तियों से सर्वोच्च होता है।

आने वाला काल ज्ञान का काल है। भले ही आमिर, गरीब या एक शक्तिशाली देश हो, अगर वो आगे बढ़ना चाहते हैं, तो ज्ञान ही उन्हें वह रास्ता दिखा सकता है।

अनुभव से सीखना और शिक्षा से सीखना, दोनों ज़रूरी है। आपकी शिक्षा और मूल्य यह तय करते हैं कि आप अपने अनुभवों से कैसे सीखते हैं।

जब मैं एक विकसित भारत के बारे में सोचता हूं, मैं एक स्वस्थ भारत को सोचता हूँ, और विशेष रूप से महिलाओं और हमारे राष्ट्र के बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के बारे में सोचता हूं।

दीपक की लौ के समान, ऊपर उठना हममें से हर एक की स्वाभाविक इच्छा है, चलिए इस इच्छा का सम्मान करें

धन जो दे कर बढ़ता है, वह धन ज्ञान है और सभी संपत्तियों से सर्वोच्च होता है।

अनुभव से सीखना और शिक्षा से सीखना, दोनों ज़रूरी है। आपकी शिक्षा और मूल्य यह तय करते हैं कि आप अपने अनुभवों से कैसे सीखते हैं।

मै बहुत आशावादी आदमी हु और एक आशावादी आदमी ही देश को आशावादी बना सकता है.|

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