सावन की शायरी

सावन की शायरी

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बारिश की बूंदों में झलकती है उसकी तसवीर
आज फिर भीग बैठे उससे पाने की चाहत में...

बारिशे हो ही जाती है मेरे शहर में,
कभी बादलो से तो कभी आँखों से...

मेरे हिस्से की ज़मीन बंजर थी, मैं वाकिफ ना था
बे-सबब इलज़ाम मैं देता रहा बरसात को..

तुम्हें पहली बारिश पसंद है और मुझे तुम
तुम्हें हँसना पसंद है मुझे हँसते हुए तुम,
तुम्हें हमसे बात करना पसंद है, मुझे बोलते हुए तुम
तुम्हें सब कुछ पसंद हैं और मुझे बस तुम...

रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ ना सकोगे
बरसात में कागज की तरह भीग गया हु..

मौसम था बेकरार तुम्हें सोचते रहे,
कल रात बार बार तुम्हें सोचते रहे
बारिश हुई तो लग कर घर के दरवाजे से हम
चुप चाप बेकरार तुम्हें सोचते रहे...

कितनी जल्दी यह मुलाकात गुज़र जाती है,
प्यास बुझती भी नहीं बरसात गुज़र जाती है,
अपनी यादों से कहो यु ना आया करे
नींद आती भी नहीं रात गुजर जाती है..

ख्यालो में वही, सपनो में वही
लेकिन उनकी यादो में हम थे ही नहीं
हम जागते रहे दुनिया सोती रही,
एक बारिश ही थी, जो हमारे साथ रोती रही..

Aaj Halki Halki Baarish Hay,
Aaj Sard Hawa Ka Raqs Bhi Hay,
Aaj Phool Bhi Nikhray Nikhray Hain,
Aaj Un Main Tumhara Aks Bhi Hay

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